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यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस से जुड़ा बिहार का तार, ‘Made in Bihar’ जूतों के साथ रूसी सेना का मार्च

यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस से जुड़ा बिहार का तार, ‘Made in Bihar’ जूतों के साथ रूसी सेना का मार्च

कॉम्पिटेंस एक्सपोर्ट्स नामक एक निजी कंपनी रूसी कंपनियों के लिए सुरक्षा जूते और यूरोपीय बाजारों के लिए डिज़ाइनर जूते बना रही है। वे इटली, फ्रांस, स्पेन और यूके जैसे देशों में लक्जरी डिजाइनर या फैशन जूते भी निर्यात करते हैं।

रूस ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखा है। इस लड़ाई में रूस की बढ़त की कहानी बिहार के हाजीपुर से भी जुड़ती है। रूसी सैनिक 'मेड इन बिहार' जूते के साथ आगे बढ़ रहे हैं। अपने कृषि उत्पादों के लिए मशहूर हाजीपुर ने रूसी सेना के लिए जूते बनाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। कॉम्पिटेंस एक्सपोर्ट्स नामक एक निजी कंपनी रूसी कंपनियों के लिए सुरक्षा जूते और यूरोपीय बाजारों के लिए डिज़ाइनर जूते बना रही है। वे इटली, फ्रांस, स्पेन और यूके जैसे देशों में लक्जरी डिजाइनर या फैशन जूते भी निर्यात करते हैं।

कंपनी के महाप्रबंधक शिब कुमार रॉय ने एएनआई को बताया, "हमने 2018 में हाजीपुर सुविधा शुरू की, और मुख्य रुचि स्थानीय रोजगार उत्पन्न करना है। हाजीपुर में, हम सुरक्षा जूते बनाते हैं जो रूस को निर्यात किए जाते हैं। कुल निर्यात है रूस के लिए, और हम धीरे-धीरे यूरोप पर भी काम कर रहे हैं और जल्द ही घरेलू बाजार में लॉन्च करेंगे।" कंपनी के फैशन विकास प्रमुख मजहर पल्लुमिया ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले जूते विकसित करना है और उसने बेल्जियम की एक कंपनी के साथ बातचीत शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, शुरुआत में कुछ आपत्तियां थीं, लेकिन नमूनों की गुणवत्ता देखने के बाद कंपनियां आश्वस्त हो गईं।

रॉय ने कहा कि प्रतिक्रिया जबरदस्त रही है और कंपनी रूस के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक बन गई है। उन्होंने पिछले साल ₹100 करोड़ मूल्य के 1.5 मिलियन जोड़े निर्यात किए, और अगले साल इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है। रॉय को उम्मीद है कि भविष्य में निर्यात संख्या में बढ़ोतरी होगी। कंपनी में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी के एमडी दानेश प्रसाद की महत्वाकांक्षा बिहार में एक विश्वस्तरीय फैक्ट्री बनाने और राज्य के रोजगार में योगदान देने की है। हम कर्मचारियों को अधिकतम रोजगार देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, जिनमें से 300 कर्मचारियों में से 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। 

उन्होंने कहा कि हालांकि बिहार सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा दिया है और समर्थन दिया है, लेकिन सड़क और संचार जैसे बुनियादी ढांचे में सुधार की जरूरत है ताकि रूसी खरीदार आसानी से संवाद कर सकें। रॉय चाहते थे कि एक प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किया जाए ताकि कंपनी शामिल करने से पहले कौशल प्रशिक्षण के खर्च से बच सके। पल्लुमिया ने कहा कि बिहार में फैशन उद्योग शुरू करना एक चुनौती है, लेकिन उन्होंने प्रमोटरों के दृष्टिकोण और सरकार के समर्थन पर भरोसा जताया।

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सरकार की सकल देनदारियां मार्च अंत में 3.4 प्रतिशत बढ़कर 171.78 लाख करोड़ रुपये हुईं: Finance Ministry

सरकार की सकल देनदारियां मार्च अंत में 3.4 प्रतिशत बढ़कर 171.78 लाख करोड़ रुपये हुईं: Finance Ministry

सरकार की कुल सकल देनदारियां दिसंबर के अंत में 166.14 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2024 के अंत में 171.78 लाख करोड़ रुपये हो गईं। वित्त मंत्रालय ने यह जानकारी दी। सार्वजनिक ऋण प्रबंधन तिमाही रिपोर्ट (जनवरी-मार्च, 2024) में कहा गया कि यह आंकड़ा तिमाही आधार पर 3.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

नयी दिल्ली । सरकार की कुल सकल देनदारियां दिसंबर के अंत में 166.14 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2024 के अंत में 171.78 लाख करोड़ रुपये हो गईं। वित्त मंत्रालय ने यह जानकारी दी। सार्वजनिक ऋण प्रबंधन तिमाही रिपोर्ट (जनवरी-मार्च, 2024) में कहा गया कि यह आंकड़ा तिमाही आधार पर 3.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। रिपोर्ट के मुताबिक समीक्षाधीन तिमाही के दौरान सार्वजनिक ऋण कुल सकल देनदारियों का 90.2 प्रतिशत था। इसमें कहा गया कि समीक्षाधीन तिमाही के दौरान, अंतरिम बजट में घोषित उधार योजना के अपेक्षा से कम रहने के चलते भारतीय घरेलू बॉन्ड के प्रतिफल में नरमी आई। 

राजकोषीय घाटे के काबू में रहने, एफपीआई प्रवाह और स्थिर मुद्रास्फीति से इसमें मदद मिली। दूसरी ओर, समीक्षाधीन तिमाही के दौरान अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल अस्थिर रहा, जो मुख्य रूप से फेडरल रिजर्व की कार्रवाई, मुद्रास्फीति और रोजगार डेटा से प्रभावित था। समीक्षाधीन तिमाही के दौरान अमेरिकी 10 वर्षीय प्रतिफल 4.33 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गया। रिपोर्ट के मुताबिक नए निर्गमों पर भारित औसत प्रतिफल 2023-24 की तीसरी तिमाही के 7.37 प्रतिशत की तुलना में 2023-24 की चौथी तिमाही में 7.19 प्रतिशत तक नरम हो गया। इसके अलावा, दिनांकित प्रतिभूतियों के निर्गमों की भारित औसत परिपक्वता 2023-24 की चौथी तिमाही में 18.75 वर्ष हो गई। यह 2023-24 की तीसरी तिमाही में 18.80 थी।

 

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करीब 17 प्रतिशत भारतीय असुरक्षित तरीके से रखते हैं महत्वपूर्ण वित्तीय पासवर्ड : सर्वे

करीब 17 प्रतिशत भारतीय असुरक्षित तरीके से रखते हैं महत्वपूर्ण वित्तीय पासवर्ड : सर्वे

लोकल सर्किल्स द्वारा किए गए सर्वेक्षण में से एक भारतीय (लगभग 17 प्रतिशत) महत्वपूर्ण वित्तीय पासवर्ड असुरक्षित तरीके से रखते हैं। सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 17 प्रतिशत लोग एटीएम, डेबिट या क्रेडिट कार्ड, बैंक खातों और ऐप स्टोर के महत्वपूर्ण पासवर्ड को ‘असुरक्षित’ तरीके से रखते (स्टोर करते) हैं।

मुंबई । प्रत्येक छह में से एक भारतीय (लगभग 17 प्रतिशत) महत्वपूर्ण वित्तीय पासवर्ड असुरक्षित तरीके से रखते हैं। मंगलवार को प्रकाशित एक हालिया सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष निकाला गया है। सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 17 प्रतिशत लोग एटीएम, डेबिट या क्रेडिट कार्ड, बैंक खातों और ऐप स्टोर के महत्वपूर्ण पासवर्ड को ‘असुरक्षित’ तरीके से रखते (स्टोर करते) हैं, जिसमें उनकी संपर्क सूची या मोबाइल फोन पर नोट शामिल हैं, जिससे डेटा चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है। लोकलसर्किल्स द्वारा किए गए सर्वेक्षण में 367 जिलों के 48,000 से अधिक उत्तरदाता शामिल थे। इसमें कहा गया कि 34 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अपने पासवर्ड दूसरों के साथ साझा करते हैं। 

लोकलसर्किल्स ने बयान में कहा कि इस साल मई में, रिजर्व बैंक ने पिछले दो वर्षों में बैंक धोखाधड़ी में 300 प्रतिशत की वृद्धि का खुलासा किया था। सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग दो-तिहाई लोगों ने कहा कि वे महत्वपूर्ण पासवर्ड अपने पास रखते हैं, जबकि शेष 34 प्रतिशत ने कहा कि वे इसे साझा करते हैं। सर्वेक्षण में कहा गया है कि उत्तरदाताओं ने बताया कि पासवर्ड साझा करने का एक बड़ा हिस्सा एक या अधिक परिवार के सदस्यों के साथ होता है, जबकि कुछ इसे घरेलू या कार्यालय के कर्मचारियों और दोस्तों के साथ भी साझा करते हैं। सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि 53 प्रतिशत लोगोंने बताया कि या तो वे स्वयं या उनके निकट परिवार के किसी सदस्य ने पिछले पांच वर्षों में वित्तीय धोखाधड़ी का अनुभव किया है।

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इलेक्ट्रिक वाहन के लिए प्रमुख मांग केंद्र के रूप में उभर रहे मझोले शहर: BNEF रिपोर्ट

इलेक्ट्रिक वाहन के लिए प्रमुख मांग केंद्र के रूप में उभर रहे मझोले शहर: BNEF रिपोर्ट

रणनीतिक शोध से जुड़ी ब्लूमबर्ग-एनईएफ के 207 शहरों में इलेक्ट्रिक दोपहिया और कार की बिक्री के विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि कुछ मझोले शहरों के बाजारों में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री महानगरों से अधिक हो रही है। इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में जो वृद्धि हो रही है, ये शहर उसका नेतृत्व कर रहे हैं।

मुंबई । देश में बड़े और मझोले या दूसरी श्रेणी के शहरों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग का अंतर कम हो रहा है। आने वाले समय में मझोले शहरों के ऐसे वाहनों के लिए बड़े मांग केंद्र के रूप में उभरने की संभावना है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। रणनीतिक शोध से जुड़ी ब्लूमबर्ग-एनईएफ (बीएनईएफ) के 10 राज्यों के 207 शहरों में इलेक्ट्रिक दोपहिया और कार की बिक्री के विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि कुछ मझोले शहरों (टियर 2) के बाजारों में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री महानगरों से अधिक हो रही है। इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में जो वृद्धि हो रही है, ये शहर उसका नेतृत्व कर रहे हैं। 

इसमें राज्यों की राजधानी आगे हैं। देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है, लेकिन देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसमें काफी अंतर है। ब्लूमबर्ग-एनईएफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जबकि अधिक विकसित बड़े शहर (टियर-1) भारत की ईवी मांग के वर्तमान केंद्र हैं, मझोले शहरों में इसकी मांग बढ़ रही है। रिपोर्ट के अंतर्गत शामिल राज्यों में दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश हैं। इसमें कहा गया है कि संभावित रूप से बड़े वाहन बाजार और ईवी विनिर्माताओं की विस्तार रणनीतियां इन मझोले शहरों को इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अगला बड़ा मांग केंद्र बना सकती हैं। 

वहीं सीमित जागरूकता और कम खर्च योग्य आय वाले छोटे शहरों में ईवी बिक्री बढ़ाने में नीति समर्थन महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु यात्री वाहन और दोपहिया वाहन दोनों क्षेत्रों में ईवी अपनाने में अन्य बड़े शहरों से आगे है। साधन संपन्न शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों में वृद्धि के कई कारण हैं। इसमें नियमित खर्च योग्य आय के साथ युवा आबादी, ईवी कैब परिचालकों की बढ़ती मौजूदगी और चुनने के लिए ईवी मॉडल की बढ़ती उपलब्धता शामिल हैं। दूसरी ओर, राजस्थान की राजधानी जयपुर में जो इलेक्ट्रिक वाहन बिके, वे राज्य के पांच मझोले शहरों में बेची गई सभी इलेक्ट्रिक कारों का 79 प्रतिशत से अधिक था। 

जयपुर में उपभोक्ताओं ने 2023 में 2,400 से अधिक इलेक्ट्रिक कारें खरीदीं, जो एक साल पहले बेचे गए लगभग 1,000 वाहनों से दोगुनी से भी अधिक है। इसी तरह, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने 2023 में राज्य में बिक्री में हुई वृद्धि की अगुवाई की। वहां मांग 1,120 इकाइयों तक पहुंच गई, जबकि केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम 840 इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री के साथ राज्य में सबसे आगे था। वहीं हरियाणा के गुरुग्राम में 2023 में लगभग 1,570 इलेक्ट्रिक वाहनें बिकीं। देश के ज्यादातर मझोले शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर अभी तक एक मजबूत बाजार नहीं है जबकि यह बड़े शहरों में बढ़ती ईवी बिक्री का एक प्रमुख कारण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका मतलब है कि छोटे शहरों में ईवी की बिक्री पूरी तरह से निजी मांग पर आधारित है।

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सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ऐतिहासिक 80,000 अंक के पार, निफ्टी नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर

सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ऐतिहासिक 80,000 अंक के पार, निफ्टी नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की तथा हांगकांग का हैंगसेंग फायदे में रहे जबकि चीन का शंघाई कम्पोजिट नुकसान में रहा। अमेरिकी बाजार मंगलवार को सकारात्मक रुख के साथ बंद हुए थे।

शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों ने बुधवार को कारोबार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की। सेंसेक्स ने पहली बार ऐतिहासिक 80,000 अंक का आंकड़ा पार किया और निफ्टी ने अपने नए सर्वकालिक उच्च स्तर को छुआ।

बीएसई का 30 तीस शेयर वाला सूचकांक सेंसेक्स 597.77 अंक उछलकर 80,039.22 अंक के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी 168.3 अंक चढ़कर 24,292.15 अंक के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।

सेंसेक्स में सूचीबद्ध कंपनियों में से एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फाइनेंस, इंडसइंड बैंक, भारती एयरटेल और नेस्ले के शेयरों में सबसे अधिक तेजी आई। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, सन फार्मा, इंफोसिस और टाटा मोटर्स के शेयर में गिरावट दर्ज की गई।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की तथा हांगकांग का हैंगसेंग फायदे में रहे जबकि चीन का शंघाई कम्पोजिट नुकसान में रहा। अमेरिकी बाजार मंगलवार को सकारात्मक रुख के साथ बंद हुए थे।

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ 86.72 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) पूंजी बाजार में मंगलवार को बिकवाल रहे और शुद्ध रूप से 2,000.12 करोड़ रुपये की कीमत के शेयर बेचे।

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