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'जब IAS Officer Puja Khedkar की मां ने बंदूक का ट्रिगर दबाया...': पुणे पुलिस ने कोर्ट में दी अहम जानकारी

'जब IAS Officer Puja Khedkar की मां ने बंदूक का ट्रिगर दबाया...': पुणे पुलिस ने कोर्ट में दी अहम जानकारी

उन्होंने दलील दी कि जब उनके मुवक्किल के खिलाफ पहली बार मामला दर्ज किया गया था, तो एफआईआर में सभी धाराएं गैर-जमानती थीं, लेकिन पुलिस ने 17 जुलाई को अचानक आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास) जोड़ दी।

ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर की मां मनोरमा खेडकर की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है। ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर की मां मनोरमा खेडकर के खिलाफ एफआईआर में आईपीसी की धारा 307 जोड़ी गई है। इस धारा को जोड़ने को उचित ठहराते हुए पुणे पुलिस ने गुरुवार को महाराष्ट्र की एक अदालत को अहम जानकारी साझा की है।

पुणे पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के सिर पर बंदूक तान दी थी। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अभियोजक ने अदालत को बताया कि जब वह गोली चलाने वाली थी तो शिकायतकर्ता डर के मारे झुक गई जबकि अन्य आरोपियों ने उसे रोक लिया। भूमि विवाद मामले में मनोरमा खेडकर की पांच दिनों की हिरासत की मांग करते हुए पुणे पुलिस ने पौड की अदालत में उन्हें, उनके पति दिलीप और तीन अन्य लोगों (जिन्हें प्राथमिकी में आरोपी बताया गया है) को "प्रभावशाली और राजनीतिक रूप से सक्रिय" व्यक्ति बताया है। इन्हें 20 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।

बता दें कि इससे पहले गुरुवार को पुणे ग्रामीण पुलिस ने मनोरमा खेडकर को रायगढ़ जिले के महाड में एक लॉज से हिरासत में लिया था गिरफ्तार करने से पहले पौड पुलिस स्टेशन लाया गया, पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक पंकज देशमुख ने पहले बताया था। धडवली के 65 वर्षीय किसान पंढरीनाथ पासलकर ने मनोरमा खेडकर, उनके पति दिलीपराव खेडकर और कई अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 323, 504, 506, 143, 144, 147, 148 और 149 तथा शस्त्र अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुणे ग्रामीण पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) भी लगाया है।

पुलिस ने मनोरमा और दिलीप खेडकर की तलाश शुरू की थी, जब एक वीडियो सामने आया था जिसमें वह 2023 में पुणे के मुलशी तहसील के धडवाली गांव में एक भूमि विवाद को लेकर कुछ लोगों को बंदूक से धमकाती नजर आ रही थीं। मनोरमा, उनके पति दिलीप और तीन अन्य पर 4 जून, 2023 को पुणे के मुलशी तहसील के धडवाली गांव में भूमि विवाद को लेकर पंढरीनाथ पासलकर नामक व्यक्ति को बंदूक दिखाकर धमकाने का आरोप है। पुलिस ने आरोप लगाया कि मनोरमा न तो जांचकर्ताओं के साथ सहयोग कर रही थी और न ही दिलीप खेडकर और अन्य तीन आरोपियों के ठिकानों, अपराध में प्रयुक्त पिस्तौल और चार पहिया वाहन के बारे में जानकारी साझा कर रही थी।

पुलिस ने आरोपी को “प्रभावशाली और राजनीतिक रूप से सक्रिय” व्यक्ति बताते हुए कहा कि वे हथियार जब्त करना चाहते हैं और इसके लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करनी चाहिए। अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि पुलिस मामले में अन्य आरोपियों का पता लगाना चाहती है। बचाव पक्ष के वकील निखिल मालानी ने पुलिस हिरासत के लिए अभियोजन पक्ष की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मनोरमा ने इस मामले में शिकायतकर्ता के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। उन्होंने कहा कि उस मामले में चार्जशीट भी दाखिल की गई थी। मालानी ने कहा, "मौजूदा शिकायतकर्ता (अपने खिलाफ दर्ज मामले के कारण) बैकफुट पर था। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद, वह आगे आया और अपने मुवक्किल के खिलाफ मामला दर्ज कराया।" 

उन्होंने दलील दी कि जब उनके मुवक्किल के खिलाफ पहली बार मामला दर्ज किया गया था, तो एफआईआर में सभी धाराएं गैर-जमानती थीं, लेकिन पुलिस ने 17 जुलाई को अचानक आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास) जोड़ दी। उन्होंने कहा कि चूंकि यह गैर-जमानती धारा है, इसलिए उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने अदालत को बताया कि मनोरमा के खिलाफ मामला बाद में दर्ज किया गया क्योंकि यह कथित घटना के 13 महीने बाद दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा, "एफआईआर में धारा 307 (हत्या का प्रयास) के संबंध में कोई वैध आशंका या तर्क नहीं है।" दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने मनोरमा को 20 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। 

 

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ED Raid| बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में ED ने हरियाणा कांग्रेस विधायक Rao Dan Singh व अन्य के ठिकानों पर छापेमारी की

ED Raid| बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में ED ने हरियाणा कांग्रेस विधायक Rao Dan Singh व अन्य के ठिकानों पर छापेमारी की

केंद्रीय एजेंसी के गुरुग्राम कार्यालय द्वारा हरियाणा के महेंद्रगढ़, बहादुरगढ़ और गुरुग्राम, दिल्ली और जमशेदपुर सहित लगभग 15 स्थानों पर तलाशी ली जा रही है। इसमें महेंद्रगढ़ निर्वाचन क्षेत्र के 65 वर्षीय विधायक, उनके बेटे अक्षत सिंह, कंपनी एलाइड स्ट्रिप्स लिमिटेड (एएसएल) और इसके प्रमोटरों मोहिंदर अग्रवाल, गौरव अग्रवाल और कुछ अन्य के परिसर शामिल हैं।

प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को हरियाणा के कांग्रेस विधायक राव दान सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की है। ये छापेमारी एक धातु निर्माण कंपनी और उसके प्रमोटरों के ठिकानों पर हुई है। यह छापेमारी कथित तौर पर 1,392 करोड़ रुपये के बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले से जुड़ी धन शोधन जांच के तहत की गई है। 


केंद्रीय एजेंसी के गुरुग्राम कार्यालय द्वारा हरियाणा के महेंद्रगढ़, बहादुरगढ़ और गुरुग्राम, दिल्ली और जमशेदपुर सहित लगभग 15 स्थानों पर तलाशी ली जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इसमें महेंद्रगढ़ निर्वाचन क्षेत्र के 65 वर्षीय विधायक, उनके बेटे अक्षत सिंह, कंपनी एलाइड स्ट्रिप्स लिमिटेड (एएसएल) और इसके प्रमोटरों मोहिंदर अग्रवाल, गौरव अग्रवाल और कुछ अन्य के परिसर शामिल हैं।

कंपनी पर 1,392 करोड़ रुपये के बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में शामिल होने का आरोप है और सीबीआई ने 2022 में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था। सूत्रों ने बताया कि आरोप है कि राव दान सिंह के परिवार और उनकी कंपनियों ने एएसएल से ऋण लिया था, लेकिन उसे कभी वापस नहीं किया और बाद में इस धनराशि को बट्टे खाते में डाल दिया गया। 

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IAS Puja Khedkar पर बड़ा एक्शन, ऑन जॉब ट्रेनिंग से बुलाया, पुणे के डीएम के खिलाफ थाने में दी शिकायत

IAS Puja Khedkar पर बड़ा एक्शन, ऑन जॉब ट्रेनिंग से बुलाया, पुणे के डीएम के खिलाफ थाने में दी शिकायत

लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए), मसूरी ने एक पत्र में कहा कि उसने पूजा दिलीप खेडकर के जिला प्रशिक्षण कार्यक्रम को रोकने का फैसला किया है और आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए तत्काल वापस बुला लिया है।

ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर पर बड़ा एक्शन हुआ है। पूजा खेडकर की ट्रेनिंग पर रोक लगा दी गई है। सरकार ने ऑन जॉब ट्रेनिंग से वापस बुला लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पूजा को मसूरी के ट्रेनिंग अकेडमी में वापस बुलाया गया है। 23 जुलाई तक पूजा खेडकर को रिपोर्ट करने के लिए कह दिया गया है। खेडकर सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए कथित तौर पर फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र बनाने के मामले में जांच के दायरे में हैं। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए), मसूरी ने एक पत्र में कहा कि उसने पूजा दिलीप खेडकर के जिला प्रशिक्षण कार्यक्रम को रोकने का फैसला किया है और आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए तत्काल वापस बुला लिया है।

सूत्रों के अनुसार, प्रोबेशनरी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर ने पुणे कलेक्टर डॉ. सुहास दिवसे के खिलाफ उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया है, जिन्होंने सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों के बाद पुणे से उनका स्थानांतरण शुरू किया था। खेडकर को पिछले सप्ताह अतिरिक्त सहायक कलेक्टर के रूप में काम करने के लिए पुणे से वाशिम स्थानांतरित किया गया था। 

IAS Pooja Khedkar: फेक सर्टिफिकेट मामले पर आई पूजा खेडकर की पहली प्रतिक्रिया, कहा- मीडिया ट्रायल द्वारा मुझे दोषी साबित करना गलत
16 जुलाई को एलबीएसएनएए के आधिकारिक नोटिस के अनुसार, वाशिम, महाराष्ट्र में सुपर न्यूमेरी असिस्टेंट कलेक्टर पूजा खेडकरको महाराष्ट्र में उनके प्रशिक्षण कर्तव्यों से मुक्त कर दिया गया है। उन्हें यथाशीघ्र और 23 जुलाई से पहले अकादमी में वापस रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है। यह फैसला खेडकर के सिविल सेवा में चयन पर विवाद पैदा होने के कुछ दिनों बाद आया है। उन पर सेवा में पद सुरक्षित करने के लिए विकलांगता और अन्य पिछड़ा वर्ग कोटा का दुरुपयोग करने का आरोप है। पिछले हफ्ते, केंद्र ने पूजा खेडकर की उम्मीदवारी की पुष्टि के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया था।

पुलिस ने जब्त की IAS Pooja Khedkar की ऑडी, अवैध रूप से लाल बत्ती लगाकर इस्तेमाल करने का है आरोप
2023 बैच की अधिकारी खेडकर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में चुने जाने के लिए कपटपूर्ण तरीके का इस्तेमाल करने के आरोपों का सामना कर रही हैं। उन्होंने खुद को कथित तौर पर शारीरिक रूप से दिव्यांग और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय का बताया था। खेडकर पर पुणे में तैनाती के दौरान विशेषाधिकारों का दुरुपयोग करने का भी आरोप है। वहीं, खेडकर ने दावा किया कि उनकी छवि खराब की जा रही है। खेडकर ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को कई मेडिकल प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे, जिनमें से एक दृष्टि संबंधी दिव्यांगता को दर्शाता है। 

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IAS Pooja Khedkar: फेक सर्टिफिकेट मामले पर आई पूजा खेडकर की पहली प्रतिक्रिया, कहा- मीडिया ट्रायल द्वारा मुझे दोषी साबित करना गलत

IAS Pooja Khedkar: फेक सर्टिफिकेट मामले पर आई पूजा खेडकर की पहली प्रतिक्रिया, कहा- मीडिया ट्रायल द्वारा मुझे दोषी साबित करना गलत

भारतीय संविधान के मुताबिक, जब तक आरोप साबित न हो जाए तब तक किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे समिति के सामने जो कुछ भी कहना होगा, मैं कहूंगी और समिति जो भी निर्णय लेगी, मैं उसे स्वीकार करूंगी।

विवादों से घिरी ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर ने कहा कि वह समिति के समक्ष अपने खिलाफ सभी आरोपों का सामना करेंगी।वर्तमान में सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए अपनी विकलांगता के बारे में कथित तौर पर झूठ बोलने के कारण जांच के दायरे में हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने इसे मीडिया ट्रायल बताते हुए कहा कि ये एक मीडिया ट्रायल है और लोग देख रहे हैं। आख़िरकार सच्चाई सामने आ ही जाएगी। भारतीय संविधान के मुताबिक, जब तक आरोप साबित न हो जाए तब तक किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे समिति के सामने जो कुछ भी कहना होगा, मैं कहूंगी और समिति जो भी निर्णय लेगी, मैं उसे स्वीकार करूंगी।

शक्तियों और विशेषाधिकारों के कथित दुरूपयोग को लेकर विवादों में आईं भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की परिवीक्षाधीन अधिकारी पूजा खेडकर ने 2007 में एक निजी चिकित्सा महाविद्यालय में नामांकन कराने के दौरान फिटनेस प्रमाणपत्र जमा किया था। संस्थान के निदेशक ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुणे के काशीबाई नवले मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ अरविंद भोरे ने कहा कि हमारे कॉलेज में 2007 में दाखिला लेने के दौरान पूजा खेडकर द्वारा सौंपे गये मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र में शारीरिक या मानसिक, किसी तरह की दिव्यांगता का उल्लेख नहीं किया गया था।

सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए फर्जी दिव्यांगता और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करने की आरोपी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर के पिता ने उनका बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया है। पूजा हाल ही में तब सुर्खियों में आईं जब उन्होंने पुणे में अपनी तैनाती के दौरान कथित तौर पर अलग केबिन और स्टाफ की मांग की थी और उसके बाद उनका अचानक वाशिम जिले में तबादला कर दिया गया। इसके बाद उन पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) (आठ लाख रुपये से कम वार्षिक आय) और दृष्टिबाधित श्रेणियों के तहत सिविल सेवा परीक्षा देकर और मानसिक बीमारी का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करके आईएएस में स्थान प्राप्त करने के आरोप लगे।  

 

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अब IAS अधिकारी पूजा खेडकर पर परेशानी और बढ़ी, अब मां के खिलाफ हुई एफआईआर, पिस्तौल लहराने का वीडियो हुआ था वायरल

अब IAS अधिकारी पूजा खेडकर पर परेशानी और बढ़ी, अब मां के खिलाफ हुई एफआईआर, पिस्तौल लहराने का वीडियो हुआ था वायरल

ये वीडियो काफी पुराना है, जिसमें पूजा की मां पिस्टल को हवा में लहराते हुए दिख रही थी। साथ ही वो कुछ लोगों को धमकाते हुए भी दिख रही थी। कहा जा रहा है की ये वीडियो वर्ष 2023 का है। ये मामला किसानों की जमीन से जुड़ा हुआ है।

महाराष्ट्र की ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर की मुश्किलें खत्म नहीं हो रही है। पूजा खेडकर के बाद अब उनकी मां पर भी गाज गिरी है। पूजा की मां का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वो पिस्तौल लहराते हुए दिख रही थी।

अब इस वीडियो के वायरल होने के बाद पूजा की मां के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। पूजा की मां मनोरमा के खिलाफ धारा 323, 504, 506, 143, 144, 147, 148 और 149 के साथ-साथ आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुई है। 

दरअसल ये वीडियो काफी पुराना है, जिसमें पूजा की मां पिस्टल को हवा में लहराते हुए दिख रही थी। साथ ही वो कुछ लोगों को धमकाते हुए भी दिख रही थी। कहा जा रहा है की ये वीडियो वर्ष 2023 का है। जानकारी के मुताबिक ये मामला किसानों की जमीन से जुड़ा हुआ है। वो किसानों को धमका रही थी।

अधिकारी के खिलाफ जांच हुई शुरू
विशेषाधिकारों के कथित दुरुपयोग को लेकर विवादों में घिरी परिवीक्षाधीन आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर को दोषी पाये जाने पर सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा और तदुपरांत सेवा में चयन के लिए उनके द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेजों की आगामी बृहस्पतिवार को केंद्र द्वारा गठित एक सदस्यीय समिति द्वारा पुनः जांच की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि समिति ने अपनी जांच शुरू कर दी है। एक सूत्र ने बताया, यदि अधिकारी दोषी पायी जाती है तो उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। यदि यह पाया जाता है कि उन्होंने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया है या यह पाया जाता है कि उनका चयन जिन दस्तावेजों के आधार पर किया गया है, उनमें किसी तरह का फर्जीवाड़ा है तो उन्हें आपराधिक आरोपों का भी सामना करना पड़ सकता है।  

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Sheena Bora Murder Case: गायब हडि्डयां CBI ऑफिस में मिलीं, जानें क्या है पूरा माजरा?

Sheena Bora Murder Case: गायब हडि्डयां CBI ऑफिस में मिलीं, जानें क्या है पूरा माजरा?

24 वर्षीय शीना बोरा की 2012 में उसकी मां इंद्राणी मुखर्जी और अन्य लोगों ने कथित तौर पर हत्या कर दी थी। यह खुलासा उसी दिन हुआ जब ट्रायल कोर्ट को एक ईमेल मिला जिसमें कहा गया था कि शीना की हड्डियां खोई नहीं थीं बल्कि वे एक फोरेंसिक विशेषज्ञ के कब्जे में थीं जिन्होंने कंकाल की जांच की थी और अब मामले में गवाह के रूप में गवाही दे रहे हैं।

शीना बोरा हत्याकांड को लेकर 10 जुलाई को मुंबई की ट्रायल कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि अप्रैल में गायब हुई हड्डियां सीबीआई के दिल्ली वाले ऑफिस के मालखाने में मिल गई है। 24 वर्षीय शीना बोरा की 2012 में उसकी मां इंद्राणी मुखर्जी और अन्य लोगों ने कथित तौर पर हत्या कर दी थी। यह खुलासा उसी दिन हुआ जब ट्रायल कोर्ट को एक ईमेल मिला जिसमें कहा गया था कि शीना की हड्डियां खोई नहीं थीं बल्कि वे एक फोरेंसिक विशेषज्ञ के कब्जे में थीं जिन्होंने कंकाल की जांच की थी और अब मामले में गवाह के रूप में गवाही दे रहे हैं।

पिछले महीने, अभियोजन पक्ष के अदालत में बयान के बाद कि शीना बोरा के अवशेष 'अप्राप्त' थे, मुख्य आरोपी इंद्राणी मुखर्जी ने दावा किया कि 2012 में कोई कंकाल अवशेष नहीं मिला था। उन्होंने पूरी कहानी को मनगढ़ंत कहानी बताया। मुखर्जी ने यह भी सुझाव दिया कि शीना बोरा के मंगेतर राहुल मुखर्जी को हत्या के मामले में पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया जाना चाहिए, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि वह आखिरी व्यक्ति थे जिन्होंने बोरा को जीवित देखा था।

अप्रैल 2012 में इंद्राणी के पूर्व पति संजीव खन्ना और ड्राइवर श्यामवर राय की मदद से शीना बोरा की कथित तौर पर उसकी मां द्वारा कार में गला घोंटकर हत्या करने के तीन साल बाद 2015 में यह हत्या सामने आई थी। शव का अंतिम संस्कार पास के रायगढ़ जिले में स्थित एक जंगल में कर दिया गया। बोरा इंद्राणी की पिछले रिश्ते से बेटी थी। 

 

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आरोपी मिहिर शाह की बढ़ी मुश्किलें, पब मालिक ने लगाया उम्र को लेकर झूठ बोलने का आरोप, फर्जी ID का इस्तेमाल किया

आरोपी मिहिर शाह की बढ़ी मुश्किलें, पब मालिक ने लगाया उम्र को लेकर झूठ बोलने का आरोप, फर्जी ID का इस्तेमाल किया

वर्ली हिट-एंड-रन केस में आरोपी मिहिर शाह की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं, बार प्रबंधन ने अब उसके खिलाफ नए आरोप लगाए हैं। रविवार सुबह से पुलिस से बचने में कामयाब रहे 24 वर्षीय मिहिर को मुंबई के पास विरार से गिरफ्तार किया गया।

वर्ली हिट-एंड-रन केस में आरोपी मिहिर शाह की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं, बार प्रबंधन ने अब उसके खिलाफ नए आरोप लगाए हैं। रविवार सुबह से पुलिस से बचने में कामयाब रहे 24 वर्षीय मिहिर को मुंबई के पास विरार से गिरफ्तार किया गया। ताजा अपडेट के अनुसार, मुंबई पुलिस नए आपराधिक कानूनों के तहत मिहिर पर नशे में गाड़ी चलाने का आरोप लगाने की योजना बना रही है।

सूत्रों ने बताया कि गुरुवार को एक जांच में पता चला कि आरोपी ने कथित तौर पर एक पहचान पत्र का इस्तेमाल किया था, जिसमें उसकी उम्र 27 साल बताई गई थी, जहां वह और उसके दोस्त पब गए थे। पब के प्रबंधन ने आरोप लगाया कि मिहिर शाह ने उन्हें पहचान पत्र दिखाया था, जिसमें दिखाया गया था कि वह 27 साल का है, इससे पहले कि वे उसे पब में प्रवेश करने दें। उसके साथ पब गए उसके तीन दोस्त 30 साल से अधिक उम्र के हैं।

प्रारंभिक जांच से पता चला है कि मिहिर द्वारा चलाई जा रही लग्जरी कार ने रविवार सुबह वर्ली इलाके में एक दोपहिया वाहन को पीछे से टक्कर मार दी, जिससे पीछे बैठी कावेरी नखवा (45) की मौत हो गई, जबकि उनके पति प्रदीप घायल हो गए।

 

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CBI ने महाराष्ट्र से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, पैसे के बदले किया था नंबर बढ़वाने का दावा

CBI ने महाराष्ट्र से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, पैसे के बदले किया था नंबर बढ़वाने का दावा

इसने परीक्षा एजेंसी एनटीए से पूछा कि प्रश्नपत्र लीक पहली बार कब हुआ, प्रश्नपत्र लीक होने का तरीका क्या था तथा लीक की घटना और 5 मई को परीक्षा के बीच कितना समय अंतराल था। सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई से कथित  पेपर लीक और अब तक प्रकाश में आई सामग्री के संबंध में अब तक की गई जांच पर स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सोमवार को नीट  पेपर लीक मामले में महाराष्ट्र के लातूर से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। इस व्यक्ति की पहचान नंजुने धप्पा के रूप में हुई है। इस पर आरोप है कि ये व्यक्ति छात्रों से पैसे लेकर उनके अंक बढ़ाने का दावा करता था।

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने नीट यूजी पेपर लीक मामले में बिहार, गुजरात और झारखंड से कई गिरफ्तारियां की हैं। इससे पहले आज, उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि 5 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक हुआ था और उसने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) से प्रश्नपत्र लीक से लाभान्वित होने वाले उम्मीदवारों की पहचान करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में उसे अवगत कराने को कहा है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने एनटीए से यह भी बताने को कहा कि उसने उन केंद्रों/शहरों की पहचान करने के लिए क्या कदम उठाए हैं जहां  पेपर लीक हुए थे और लीक के लाभार्थियों की पहचान करने के लिए क्या तौर-तरीके अपनाए गए और लीक का प्रसार कैसे हुआ। यह कहते हुए कि नीट-यूजी परीक्षा में  पेपर लीक होने के तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता, पीठ ने कहा कि यह पता लगाना होगा कि क्या लीक की प्रकृति व्यापक थी या अलग-थलग थी, तभी दोबारा परीक्षा का आदेश देने पर निर्णय लिया जा सकता है।

उन्होंने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि परीक्षा की पवित्रता से समझौता किया गया है।" यह एक स्वीकृत तथ्य है कि रिसाव है और रिसाव की प्रकृति कुछ ऐसी है जिसका हम पता लगा रहे हैं। यदि यह व्यापक नहीं है तो रद्दीकरण नहीं होगा। लेकिन दोबारा परीक्षा का आदेश देने से पहले हमें लीक की सीमा के बारे में सचेत होना चाहिए, क्योंकि हम 23 लाख छात्रों के मामले से निपट रहे हैं...", पीठ ने कहा।


प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "लीक की प्रकृति क्या है, लीक कैसे हुई, समय क्या था, लीक कैसे फैलाई गई, इस गड़बड़ी के लाभार्थी छात्रों की पहचान करने के लिए केंद्र और एनटीए ने क्या कार्रवाई की है।" सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि लीक सोशल मीडिया पर होती तो यह बहुत व्यापक हो जाती।

इसने परीक्षा एजेंसी एनटीए से पूछा कि प्रश्नपत्र लीक पहली बार कब हुआ, प्रश्नपत्र लीक होने का तरीका क्या था तथा लीक की घटना और 5 मई को परीक्षा के बीच कितना समय अंतराल था। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कथित  पेपर लीक और अब तक प्रकाश में आई सामग्री के संबंध में अब तक की गई जांच पर स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस बात की जांच करनी होगी कि क्या कथित उल्लंघन प्रणालीगत स्तर पर हुआ है, क्या उल्लंघन ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया की अखंडता को प्रभावित किया है, और क्या धोखाधड़ी के लाभार्थियों को बेदाग छात्रों से अलग करना संभव है।


इसमें कहा गया है कि ऐसी स्थिति में जहां उल्लंघन से पूरी प्रक्रिया प्रभावित होती है और लाभार्थियों को अन्य से अलग करना संभव नहीं होता, तो पुनः परीक्षण का आदेश देना आवश्यक हो सकता है। इसमें कहा गया है कि जहां उल्लंघन विशिष्ट केंद्रों तक ही सीमित है और गलत कार्य के लाभार्थियों की पहचान करना संभव है, वहां ऐसी परीक्षा को दोबारा कराने का आदेश देना उचित नहीं होगा, जो बड़े पैमाने पर आयोजित की गई हो।

शीर्ष अदालत ने सीबीआई को 10 जुलाई शाम पांच बजे तक स्थिति रिपोर्ट और केंद्र तथा एनटीए को सभी विवरणों के साथ अपने हलफनामे दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी। शीर्ष अदालत नीट-यूजी 2024 के परिणाम वापस लेने और परीक्षा नए सिरे से आयोजित करने के निर्देश देने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें परीक्षा में  पेपर लीक और गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था।

अभ्यर्थियों ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था और प्रश्नपत्र लीक होने, अतिरिक्त अंक दिए जाने और नीट-यूजी के प्रश्नों में विसंगति का मुद्दा उठाया था। एनटीए द्वारा आयोजित नीट-यूजी परीक्षा देश भर के सरकारी और निजी संस्थानों में एमबीबीएस, बीडीएस और आयुष तथा अन्य संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश का मार्ग है। नीट-यूजी, 2024 का आयोजन 5 मई को 4,750 केंद्रों पर किया गया था और इसमें लगभग 24 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे।

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हाथरस हादसे में UP Police का पहला बड़ा एक्शन, आयोजन समिति से जुड़े 6 लोग गिरफ्तार, मुख्य आरोपी पर एक लाख का इनाम

हाथरस हादसे में UP Police का पहला बड़ा एक्शन, आयोजन समिति से जुड़े 6 लोग गिरफ्तार, मुख्य आरोपी पर एक लाख का इनाम

शलभ माथुर ने कहा कि जब भगदड़ मची तो वे छह सेवक, जिन्हें अब गिरफ्तार कर लिया गया है, घटनास्थल से भाग गए थे। मुख्य आरोपी प्रकाश मधुकर की गिरफ्तारी पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया जा रहा है। जल्द ही उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार को कहा कि हाथरस में एक सत्संग के बाद हुई भगदड़ के मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कहा कि वे सभी सत्संग आयोजित करने वाली आयोजन समिति के सदस्य हैं। अलीगढ़ के महानिरीक्षक शलभ माथुर ने कहा, "घटना में चार पुरुषों और दो महिलाओं सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वे सभी आयोजन समिति के सदस्य हैं और 'सेवादार' के रूप में काम करते हैं।" 

शलभ माथुर ने कहा कि जब भगदड़ मची तो वे छह सेवक, जिन्हें अब गिरफ्तार कर लिया गया है, घटनास्थल से भाग गए थे। मुख्य आरोपी प्रकाश मधुकर की गिरफ्तारी पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया जा रहा है। जल्द ही उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया जाएगा। हम इस बात की भी जांच करेंगे कि क्या यह घटना किसी साजिश के कारण हुई है। हाथरस भगदड़ मामले में उपदेशक हरिनारायण साकार उर्फ भोले बाबा की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पुलिस ने बाबा के मैनपुरी स्थित आश्रम में उसके मौजूद नहीं होने का दावा किया है। 

सूत्रों के मुताबिक, मैनपुरी के बिछवां कस्बे में स्थित भोले बाबा के आश्रम में बुधवार रात पुलिस दाखिल हुई थी। मगर इस बारे में कोई भी पुलिस अफसर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। पुलिस क्षेत्राधिकारी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस और स्पेशल आपरेशन ग्रुप (एसपीजी) के लोग आश्रम परिसर में गये थे लेकिन उनकी ड्यूटी आश्रम के अंदर नहीं बल्कि बाहर थी। उन्होंने कहा, 50-60 सेवादार आश्रम के अंदर मौजूद हैं। इनमें महिला और पुरुष दोनों हैं। इस सवाल पर कि क्या बाबा अपने आश्रम में मौजूद हैं, सिंह ने कहा, वह ना कल थे, ना आज हैं। 

 

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